ऐसा करके वे माता से शांति की प्रार्थना कर सकते हैं.
सामग्री तैयार करें: मिट्टी का पात्र (जिसमें जौ उगाने के लिए मिट्टी भरी हो)
गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की दस महाविद्याओं (काली, तारा, बगलामुखी, त्रिपुरसुंदरी, छिन्नमस्ता, भुवनेश्वरी, धूमावती, मातंगी, कमला और भैरवी) की साधना की जाती है। ये महाविद्याएं साधक को विशेष आध्यात्मिक शक्तियां और सिद्धियां प्रदान करती हैं।
यह समय आत्मज्ञान और ईश्वर के करीब जाने का अवसर प्रदान करता है।
अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।
विश्वविद्यालय फर्जी मार्कशीट बांट रहा था.
* पितृदोष और कालसर्प दोष जैसे दोषों को दूर करती हैं।
घट (कलश) स्थापना नवरात्रि पूजा का प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यह शुभता, ऊर्जा, और देवी दुर्गा की उपस्थिति का प्रतीक है।
गुप्त नवरात्रि के अनुष्ठान व्यक्ति के जीवन से संकट, आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक होते हैं।
मंत्र साधना: साधक अपनी साधना के अनुसार गुरु से प्राप्त मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
Uday Navratri, often called Prakat Navratri, is thoroughly celebrated from north to south and east to west with terrific enthusiasm and zeal. They symbolize Local community gatherings using a concept of devotion and triumph of fine in excess of evil.
घट स्थापना करें: मिट्टी के पात्र में जौ (जवारे) बोएं।
मां की website आरती गाएं, उन्हें फूल, अक्षत चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं।
कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं।
मंत्र साधना के लिए एकांत और शांत स्थान चुनें।